Sunday, 11 December 2016

छाता

नन्हे हाथी ने छाता पाया
छाता ले वो झटपट आया

नानी से पूछा उसने आकर
“छाता लेते हैं सब क्योंकर” 

नानी को यह समझ न आया
छाता नन्हे ने कहाँ से पाया

पर नानी बोली बड़े प्यार से
“जब भी दिन में पानी बरसे

छाता लेकर चलते कुछ लोग
भीग जाने से उनको लगता रोग”

नन्हा बोला सुन नानी की बात
“नानी यह तो है अजब ही बात

वर्षा की बूँदें तो होतीं हैं न्यारी
वर्षा मुझ को लगती है प्यारी

वर्षा में भीगना ही मुझको भाता

मुझको न चाहिए कोई छाता-वाता”.

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