Sunday, 11 December 2016

छाता

नन्हे हाथी ने छाता पाया
छाता ले वो झटपट आया

नानी से पूछा उसने आकर
“छाता लेते हैं सब क्योंकर” 

नानी को यह समझ न आया
छाता नन्हे ने कहाँ से पाया

पर नानी बोली बड़े प्यार से
“जब भी दिन में पानी बरसे

छाता लेकर चलते कुछ लोग
भीग जाने से उनको लगता रोग”

नन्हा बोला सुन नानी की बात
“नानी यह तो है अजब ही बात

वर्षा की बूँदें तो होतीं हैं न्यारी
वर्षा मुझ को लगती है प्यारी

वर्षा में भीगना ही मुझको भाता

मुझको न चाहिए कोई छाता-वाता”.

Thursday, 1 December 2016


नटखट बन्दर 



इक बन्दर था थोड़ा नटखट
करता था वह हरदम खटपट
सबको था वो खूब सताता
उसको था न कुछ आता-जाता
इक दिन भालू से शर्त लगाईं
और इक पेड़ से कूद लगाईं
दूजे पेड़ पर था उसको जाना
पर उसने था यह न जाना
इक सांप था दूजे पेड़ पर
सोया था वह आँख मूंद कर
बन्दर ने इक डाल को पकड़ा
सांप ने उसको झट से जकड़ा
सांप था सोया उसी डाल पर
जिस पर कूदा था नटखट बन्दर
सांप देख कर ज़ोर से चिल्लाया

सर के बल वो नीचे आया